Success Story of IAS Govind Jaiswal : रिक्शे वाले का बेटा बना मात्र 21 वर्ष की उम्र में आईएएस अधिकारी, हासिल की 48 वीं रैंक

Success Story of IAS Govind : नमस्कार दोस्तों जैसा की हम सभी जानते है कि आईएएस एक परीक्षा की दृष्टि से तथा हम यदि एक संस्थान के माध्यम से नजर डाले तो यह एक प्रतिष्ठित तथा भारत में सबसे अधिक सम्मान प्राप्त करने वाली परीक्षा रही है ! आपको बता दे की इस में प्रमुख रूप से सभी को लाभ नही मिलता है न ही दिया जाता है यह परीक्षा लोक सेवा के लिए चलायी जाती है !

आप को बता दे की उन्हें अधिक से अधिक देश सेवा का अवसर प्राप्त होता है आज के समय में हम सभी मे से बहुत बड़ी संख्या में लोगो का यह सपना होता है की वे आईएएस ऑफिसर बने किन्तु इस के लिए जो त्याग बलिदान करना पड़ता है ! वह हर किसी के लिए आसान नही होता है ऐसी ही एक कहानी है रिक्शा चलने वाले के सुपुत्र गोविन्द जायसवाल की तो चलिए आपको उनके संघर्ष के बारे में बताते है |

Success Story of IAS Govind Jaiswal

Success Story of IAS Govind
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रिक्शे वाले का बेटा बना मात्र 21 वर्ष की उम्र में आईएएस अधिकारी

जैसा की हम सभी को पता है आईएएस एग्जाम को पास करना सोच का कर्म का विषय है ! आप को बता दे की गोविन्द जायसवाल का जन्म एक छोटे से परिवार में हुआ ! उनकी मासिक तथा आर्थिक हालत बहुत ही विकट थी हम यदि आपको बता दे की उन्हें इस के एग्जाम के लिए पढ़ाई करने में बहुत भारी समस्या का सामना करना पड़ा ! उन्होने हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी दृढ़ निश्चय से इस एग्जाम को पास करने का लक्ष्य बना लिया ! आप को बता दे की उन्होंने अपनी पढ़ाई बहुत ही कम आयु में इस छोटे से स्कूल जो उस्मानिया ग्राम में है ! वहा सेपुरी की तथा बचपन में ही उनकी माँ का देहांत हो गया तथा उनकी 3 बहने और परिवार के सभी ( 5 सदस्य ) का पूर्ण जीवन यापन का खर्च उन्होंने ही उठाया |

उनके पिता जी सभी का खर्च वहन करने के लिए दिन रात एक कर के मेहनत किया करते रहते थे ! उन्होंने अपने सभी बच्चो को अच्छी परवरिश दी और उन्हें अधिक से अधिक सुविधा देने का प्रयास किया ! गोविन्द जयासवाल बचपन से ही पढ़ाई मे अच्छे थे और उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए अच्छे कार्य करने के लिए तथा अच्छी सुविधा देने के लिए अपनी पढ़ाई को हमेसा अच्छा बनाये रखा ! उन्होंने अधिक से अधिक प्रयास किये गोविन्द जयासवाल ने अपनी स्नातक की पढ़ाई बीएससी के द्वारा की तथा उसके उपरांत उन्होंने मन बनाया की उन्हें आईएएस ऑफिसर बनने का निर्णय लिया ! उनकी आगे की शिक्षा के लिए उनके पिता जी ने अपनी जमींन को कम भाव में अर्थात मात्र 40 हजार में बेच कर अपने पुत्र को दिल्ली आईएएस की पढ़ाई के लिए भेज दिया |

गोविन्द जयासवाल रोज 18 – 20 घंटे पढ़ाई करते थे उन्होंने पहली बार आईएएस की परीक्षा में 2006 में भाग लिया था ! गोविन्द जयासवाल डॉ एपीजे कलाम को आपने गाइडलाइन मानते है ! आप को बता दे की उनकी बहनो ने भी उनका बड़ी मात्रा में सहयोग किया तथा आप को बता दे की उनके दिल्ली जाते ही उनके पास रहने तथा खाने की समस्या आ गयी इन सभी समस्या के निदान के लिए उन्होंने कोचिंग पड़ना शुरू किया !

आप को बता दे की वे पैसे बचाने के लिए कई बार भूखे भी रहा करते थे उन्होंने अपना ऑप्शनल इतिहास को लिया क्योकि उनके दोस्त के पास इतिहास की बुक हुआ करती थी ! उन्होंने इस के लिए अधिक से अधिक मेहनत की तथा अपने अधिक से अधिक मेहनत साथ तथा धैर्य के साथ उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास की तथा उन्होंने आईएएस में सम्पूर्ण भारत में 48 वा स्थान प्राप्त किया ! आज के समय में वे नागालैंड में रेवन्यू तथा आपदा प्रबंधन अधिकारी के रूप में नियुक्त है |

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