IAS Success Story : आर्थिक रूप से कमजोर रमेश घोलप बनें आईएएस अधिकारी

IAS Success Story Of Ramesh Gholap : इंसान को क्या सफलता तक पहुंचना है तो उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। बिना मेहनत के कोई भी इंसान सफल नहीं हो पाता। यदि इंसान के इरादे मजबूत हो तो कोई भी राह पर चल सकता है। दुनिया की कोई भी ताकत उस इंसान को फिर नहीं रुक पाएगी। यदि आपने सोच लिया है कि आपको इस मंजिल तक जाना है तो आप अवश्य सफल होंगे। मंजिल तक पहुंचने के लिए दृढ़ निश्चय और मंजिल की तरफ एकाग्र होना अनिवार्य है। आज हम ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बात करेंगे। जिन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत करते गए। अंत में उनकी मेहनत सफल हुई। बुरे वक्त में भी उसने अपने आप को झुकने नहीं दिया और आज अपने मंजिल पर आ खड़ा है।

IAS Success Story Of Ramesh Gholap : आर्थिक रूप से कमजोर रमेश घोलप बनें आईएएस अधिकारी

IAS Success Story Of Ramesh Gholap

आईएएस रमेश घोलाप

व्यक्ति के इरादे मजबूत हो तो सफलता दूर नहीं। रमेश घोलप सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा के पात्र बन चुके हैं। यह अप्रैल सर्विस में भर्ती होना चाहते थे। रमेश को बचपन में पोलियो हो गया। रमेश की परिवार की आर्थिक स्थिति भी उतनी सही नहीं थी कि उनका इलाज किया जा सके। रमेश घोलप जिंदगी में काफी ज्यादा से परेशानियों का सामना किया है। पोलियो के शिकार होने के कारण उन्हें बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। रमेश को बाएं पैर में पोलियो हो गया था। उन्होंने उसी समय ठान लिया था कि इन्हें खुद को साबित करना है। उन्होंने दृढ़ निश्चय लिया था कि वह खुद को सफलता की कगार पर पहुंचा करे रहेंगे।

आर्थिक स्थिति थी कमजोर

Indian Administrative Service रमेश घोलप की आर्थिक स्थिति भी काफी कमजोर थी। रमेश की मां चूड़ियां बेचती थी। रमेश अपनी मां के साथ सड़क पर चूड़ियां बेचा करते थे। रमेश के परिवार ने बहुत सारे मुश्किलों का सामना किया है। आपको बता दें कि रमेश के पिताजी भी उतने कामयाब नहीं थे। इनके पिता की एक छोटी सी साइकिल की दुकान थी। रमेश के परिवार में कुल 4 लोग थे। रमेश दो भाई थे। आपको बता दें कि रमेश के पिता को शराब की एक बुरी आदत थी। वह दिन भर शराब के नशे में धुत रहते थे। शराब की आदत ने उनके पिता को हॉस्पिटल पहुंचा दिया। अस्पताल में एडमिट होने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी इनकी मां पर आ गई। गरीबी के कारण इनकी माता को सड़क पर चूड़ियां बेचना पड़ा ताकि घर को संभाल पाए।

अचानक हुआ पिता का निधन

UPSC IAS रमेश आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए अपने चाचा के गांव चले गए। गांव का नाम था बरसी। 2005 में जब रमेश 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे तब उन्हें एक शोक संदेश मिला। रमेश के पिता की अचानक मृत्यु हो गई। अपने पिता के निधन होने की खबर सुनकर है रमेश काफी ज्यादा टूट चुके थे। रमेश उस वक्त अपने चाचा के गांव में थे और उन्हें अपने गांव जाना था। उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह बस का किराया भी दे सकें। परंतु अपने आसपास के लोगों की मदद से रमेश किसी तरह अपने गांव पहुंचे। रमेश ने बहुत ही नम आंखों से अपने पिता को अंतिम विदाई दी। रमेश काफी ज्यादा निराश हो चुके थे। सर से आप पिता का हाथ उठ चुका था।

मेहनत रंग लाई

IAS Success Story Of Ramesh Gholap रमेश ने 12वीं के बाद डिप्लोमा लिया और अपने ही गांव के विद्यालय में शिक्षक बन गए। डिप्लोमा के साथ रमेश ने एमबीए की डिग्री भी हासिल की। शिक्षक बनकर व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। लेकिन उनका यह लक्ष्य नहीं था। उन्हें तो कुछ और बना था। रमेश ने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी करने लगे। 2010 में असफल होने के बाद उन्होंने 2012 में परीक्षा पास कर लिया। रमेश की मेहनत रंग लाई और वह आईएएस बन गए।

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