Success Farmer Story : इस शख्स ने खेती कर विदेश में भी अपने नाम बनाया

Agriculture Farmer Success Story इस शख्स ने खेती कर विदेश में भी अपने नाम बनाया : आज हम अपने इस आर्टिकल में एक शख्स के बारे में कहानी बताने जा रहे है जो अपनी पहचान विदेश में भी बना चूका है ! इस किसान का नाम करुण कुमार गुरेजा है जोकि सहारनपुर के मरवा गांव के है ! खेती और बागवानी से मायूस हो चुके इस किसान की कहानी बहुत ही दर्द भरी है तो आइये आप सभी को इस किसान की कहानी बताते है कि खेती कर के विदेश कैसे इस किसान ने अपना नाम बनाया |

Farmer Success Story : इस शख्स ने खेती कर विदेश में भी अपने नाम बनाया

Success Farmer Story इस शख्स ने खेती कर विदेश में भी अपने नाम बनाया

Success Farmer Story इस शख्स ने खेती कर विदेश में भी अपने नाम बनाया

करुण कुमार गुरेजा एक ग्रामीण किसान है जो मरवा गांव के रहने वाले है ! उन्होंने बताया कि वह खेती और बागवानी को घाटे का सौदा मन कर बहुत ही मायूस हो चुके थे ! फिर एक दिन वह मंडी समिति को ओर से जयपुर में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चर मार्केटिंग से बागो का प्रशिक्षण प्राप्त किया ! और फिर बागो की अच्छी क्वालिटी आम पैदा करके उन्हें निर्यात करने की मन में ठान ली |

Agriculture Farmer Success Story in Hindi

इसके बाद उन्होंने अपने खेतो में आम का बागान लगाया जिसमे दशहरी, लंगड़ा, चौसा और भी आम की बहुत सी किस्मो का उत्पादन करना शुरू कर दिया ! इस आम की खेती में उन्हें बहुत अच्छा लाभ मिलाने लगा और उन्होंने मन लगा कर इस आम की खेती को करना शुरू कर दिया ! उन्होंने 70 टन आम का विदेश में निर्यात कर नबाव ब्रांड का डंका बजाया !

उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान जैसे देशो में कड़े मानको पर उन्होंने अपने आम को खरा भी साबित किया ! यूरोपीय संघ की पाबंदी के बावजूद भी इस साल जिले से करीब 121 टन आम का निर्यात किया गया ! इसमें से कम से कम 70 से 80 टन आम का योगदान मरवा गांव के किसान करुण कुमार गुरेजा बने ! और उन्होंने कई सारे देशो में भी आम का निर्यात करना शुरू कर दिया |

खेतो में खाद का प्रयोग किया

करुण कुमार गुरेजा पहले अपने खेत की मिटटी की जाँच करवाई उसके बाद रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने अपने खेतो में खाद का प्रयोग किया ! बागान में आम को कीटो से बचने के लिए उन्होंने विदेश से पेपर बैग मगांए और फिर आम को कीटो से बचने के लिए आम पर बैग चढ़ाये ! इससे फायदा यह हुआ कि आम कीटो से भी बचे रहे और आम की अच्छी गुडवत्ता भी बनी रही जिससे बाजार में आमों का दाम अच्छा मिलता है ! और यह खाने में भी स्वाद अच्छा रहता है !

इस प्रकार उन्होंने विदेशो में आम का निर्यात किया और बहुत सारा लाभ कमाया ! उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान जैसे देशो में कड़े मानको पर उन्होंने अपने आम को खरा भी साबित किया ! इस प्रकार वह नए नए तरीको से आम का अच्छा उत्पादन करते है और हर साल लाखो रुपये कमाते है ! और आम पर दवा के छिड़काव के लिए स्प्रे मशीन का प्रयोग करते है !

आम के एक सीजन में पैसे का खर्च

आम में एक सीजन में कुल खर्च ज्यादा नहीं आता है इसमें आम में फूल आते समय आसमान साफ होने पर व वर्षा न होने से फल अधिक संख्या में बनते है और अधिक उपज भी प्राप्त होती है | आम में अधिकतर खाद, दवा, और आम की तुड़ाई में ही पैसे का खर्च आता है !|आम सबसे कम खर्च में अधिक पैसा देने वाली फसल है !

आम के निर्यात में लगत

आम के निर्यात में लगत किलो के हिसाब से लगती है जिसमे कि आम का बजन अलग और बॉक्स का बजन अलग होता है ! इसमें करीब 200 – 250 रुपये किलो का खर्च आता है जिसमे कि आम का 40 – 50 रुपये, 120 – 130 किराया, 30 – 35 रुपये आम की पैकिंग, 30 – 35 रुपये प्रोसेसिंग चार्ज आदि !

निर्यात करने वाले आमो की तुड़ाई

जिन आमों को विदेश में निर्यात किया जाता है उनकी तुड़ाई कुछ खास प्रकार से होती है ! आइये आपको बताते है कि  प्रकार आम की तुड़ाई की जाती है ! निर्यात करने वाले आमों  तोड़ने के लिए हाइड्रोलिक मशीन का इस्तेमाल किया जाता है जिसमे कि आम अच्छे से टूट जाये और उसमे कोई भी स्क्रेच नहीं लगे ! ऐसे आमों की कीमत विदेशो में ज्यादा होती है कि 400 – 500 रुपये किलो तक बिका जाता है |

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