Agriculture Success story : नौकरी छोड़कर की मोती की खेती, हुआ लाखों का फायदा

Agriculture Success story नौकरी छोड़कर की मोती की खेती : आज के समय पर सभी लोग नौकरी के पीछे भागते हैं। सभी के लिए नौकरियां ही एक जरिया है कमाई का। लेकिन हम आपको बता दें कि एक व्यक्ति ऐसा है जिसने नौकरी छोड़कर की मोतियों की खेती। इस किसान ने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि वह मोतियों की खेती कर सकें। लोग खेती को बहुत मामूली समझते हैं। मगर एक व्यक्ति ऐसा है जिन्होंने इन सारी बातों को झुठला दिया। उस व्यक्ति ने मोतियों की खेती शुरू की और लाखों का मुनाफा किया। यह व्यक्ति उत्तर प्रदेश के बिजनौर में रहता है। इसका नाम कमलदीप है। बिजनौर में है कमलदीप का नाम बहुत ही इज्जत से लिया जाता। इसने खेती की एक बड़ी मिसाल पेश की है।

Agriculture Success story : नौकरी छोड़कर की मोती की खेती, हुआ लाखों का फायदा

Agriculture Success story : नौकरी छोड़कर की खेती, हुआ लाखों का फायदा

कमलदीप ने छोड़ दी नौकरी

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में रहने वाले कमलदीप विदेश में नौकरी करते थे। विदेश में उनकी अच्छी खासी कमाई हो जाती थी। भारत से दूर विदेश में रहकर भी उन्हें अपने गांव की याद आती रहती थी। विदेश में नौकरी करते थे परंतु उनका मन कहीं ना कहीं अपने गांव में ही लगा रहता था। कमलदीप के लिए खेती बहुत मायने रखती है। कहीं ना कहीं कमलदीप जानते थे कि खेती में नौकरी से ज्यादा फायदा है। अंत में उन्होंने नौकरी छोड़ दिया और भारत आ गए। फिर वह अपने गांव गए और कुछ काम करने लगे। बलदीप के इस फैसले ने इन लोगों को काफी ज्यादा अचंभित कर दिया था। उनके गांव के लोग कमलदीप पर हंसा करते थे। लोग उन्हें कहते थे कि तुम मामूली खेती के लिए विदेश में नौकरी छोड़ कर आए हो। परंतु कमलदीप के मन में कुछ और ही चल रहा था।

शुरू की मोतियों की खेती

कमलदीप विदेश में नौकरी छोड़कर अपने गांव लौट चुके थे। गांव के लोगों के लिए मोतियों की खेती काफी छोटी बात थी। कमलदीप ने मोतियों की खेती शुरू की तब उन पर काफी हसा गया था। लोग इनका मजाक उड़ाने लगे थे। कमल जी के गांव पर है आमतौर पर लोगों के गेहूं, धान और गन्ने की खेती करते थे। कमलदीप अपने मोतियों की खेती में काफी ज्यादा बदलाव लाए। उन्होंने मोतियों पर अनोखे प्रयोग करने शुरू कर दिए। अब गांव वालों के लिए मोतियों की खेती एक आकर्षण का केंद्र बन चुका था। कमलदीप ने एक तालाब बनवाया, जिसमें मोतियों की खेती करनी शुरू कर दी। मोतियों की खेती पर कमलदीप को बहुत ज्यादा फायदा हुआ। इनके गांव पर धान, गेहूं और गन्ने की खेती से जिन लोगों को फायदा होता था। उनसे कहीं ज्यादा फायदा कमलदीप ने मोतियों की खेती में कर लिया।

कैसे की मोतियों की खेती

Agriculture Success story जैसा कि कमलदीप ने बताया मोतिया सीप के द्वारा उत्पन्न होती है। सीप के अंदर एक कीड़ा पाया जाता है। फिर उसके बाद उसमें एक छोटा सा छेद करके वहां एक आकृति डाल दी जाती है। आमतौर पर यह धार्मिक आकृतियां होती है। आकृतियों के रूप में धार्मिक चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। आकृति पर सीप के अंदर में मौजूद कीड़ा कैल्शियम की एक परत बनाता जाता है। 1 वर्ष के बाद सीपो को तोड़ दिया जाता है। तोड़ने के बाद उसके अंदर से वह आकृति को निकाल लिया जाता है जिस पर कीड़े के द्वारा कैल्शियम की परत चढ़ चुकी होती है। मोती की खेती से एक तालाब में 15 से 20 लाख रुपए तक की मोती पाई जा सकती है।

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